​”नया क्रिकेट बैट लिया है? तो ये गलती उसे 2 दिन में तोड़ देगी! जानें Cricket bat knocking and oiling process का सही तरीका”

Cricket bat knocking and oiling process ​“जब हम अपनी मेहनत की कमाई से एक नया English Willow या Kashmir Willow बैट खरीदते हैं, तो हमारा मन करता है कि उसे सीधे मैदान पर ले जाएं और छक्के जड़ना शुरू कर दें। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यही जल्दबाजी आपके हज़ारों रुपये के बैट को पहली ही गेंद पर तोड़ सकती है?

​जी हाँ! एक नए क्रिकेट बैट को ‘युद्ध’ के लिए तैयार करने के लिए Knocking (नॉकिंग) और Oiling (ऑयलिंग) उतनी ही ज़रूरी है, जितनी कार के लिए इंजन ऑयल। अगर आपने बैट की सही से नॉकिंग नहीं की, तो न तो आपको बैट में वो ‘पिंच’ (PUNCH) मिलेगा और न ही आपका बैट ज्यादा दिनों तक टिक पाएगा।

​आज के इस खास लेख में, हम आपको बताएंगे कि प्रोफेशनल खिलाड़ी अपने बैट को कैसे तैयार करते हैं और वो कौन सी 3 बड़ी गलतियां हैं जिनसे आपको हर हाल में बचना चाहिए…”

स्टेप 1: ऑयलिंग (Oiling) – बैट को नमी देना

​नया बैट अक्सर सूखा होता है। ऑयलिंग करने से बैट की लकड़ी (Willow) में लचीलापन आता है और वह टूटने से बचती है।

  • कौन सा तेल इस्तेमाल करें? हमेशा Raw Linseed Oil (अलसी का कच्चा तेल) का ही उपयोग करें।
  • कैसे लगाएं? एक साफ कपड़े या रुई की मदद से तेल की 2-3 बूंदें बैट के फेस (आगे), किनारों (Edges) और पीछे की तरफ लगाएं।
  • सावधानी: बैट के Splice (जहाँ हैंडल जुड़ता है) और Toe (बैट का सबसे निचला हिस्सा) पर ज्यादा तेल न लगाएं, इससे हैंडल की पकड़ ढीली हो सकती है।
  • सुखाना: तेल लगाने के बाद बैट को कम से कम 24 घंटे के लिए सपाट (Flat) लिटा कर छोड़ दें।

स्टेप 2: नॉकिंग (Knocking) – लकड़ी को मजबूत बनाना

​यह सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। नॉकिंग का मतलब है लकड़ी के रेशों (fibers) को दबाकर मजबूत करना ताकि गेंद लगने पर बैट फटे नहीं।

  • क्या चाहिए? एक अच्छी क्वालिटी का लकड़ी का Mallet (हथौड़ा) या एक पुरानी लेदर बॉल।
  • शुरुआत कैसे करें? धीरे-धीरे बैट के बीच वाले हिस्से (Sweet Spot) पर प्रहार करना शुरू करें।
  • किनारों (Edges) पर ध्यान दें: बैट के किनारे सबसे नाजुक होते हैं। मैलेट को 45 डिग्री के कोण (angle) पर रखकर किनारों को धीरे-धीरे ठोकें ताकि वे गोल और मजबूत हो जाएं।
  • समय: एक नए बैट को कम से कम 6 से 10 घंटे की नॉकिंग की जरूरत होती है। इसे एक दिन में करने के बजाय 3-4 दिनों में थोड़ा-थोड़ा करें।

स्टेप 3: नेट प्रैक्टिस (Testing in Nets)

​जब आपको लगे कि बैट पर मैलेट के निशान नहीं पड़ रहे हैं, तब उसे नेट्स पर ले जाएं।

  • ​शुरुआत में पुरानी या सॉफ्ट लेदर बॉल से ‘Shadow Practice’ करें।
  • ​तेज गेंदबाजों का सामना करने से पहले कुछ दिन स्पिनर्स के खिलाफ खेलें।
  • ​अगर गेंद लगने पर बैट की लकड़ी दब रही है, तो इसका मतलब है कि अभी और नॉकिंग की जरूरत है।

Cricket bat knocking and oiling process

क्या आपका बैट खेलने के लिए तैयार है?

  • ​✅ क्या आपने Raw Linseed Oil की 2 परतें लगाई हैं?
  • ​✅ क्या किनारों (Edges) पर 10,000 से ज्यादा बार मैलेट (Mallet) चलाया है?
  • ​✅ क्या आपने बैट को 24 घंटे सूखने के लिए छोड़ा है?

विलो के प्रकार (Types of Willow)

​क्रिकेट जगत में मुख्य रूप से दो तरह की लकड़ियों का इस्तेमाल होता है:

  • इंग्लिश विलो (English Willow): यह सबसे प्रीमियम लकड़ी है। यह हल्की और बहुत लचीली होती है, जिससे गेंद बल्ले से टकराते ही रॉकेट की तरह निकलती है। पेशेवर खिलाड़ी इसी का इस्तेमाल करते हैं।
  • कश्मीर विलो (Kashmir Willow): यह इंग्लिश विलो की तुलना में थोड़ी भारी और सख्त होती है। यह शुरुआती खिलाड़ियों (Beginners) और टेनिस बॉल क्रिकेट के लिए बेहतरीन और किफायती विकल्प है।

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ग्रेन्स का गणित (Understanding Grains)

​बैट के फेस पर जो सीधी रेखाएं दिखती हैं, उन्हें ‘Grains’ कहते हैं।

  • 6-8 ग्रेन्स: यह बैट लंबे समय तक चलता है और धीरे-धीरे अपनी पूरी फॉर्म में आता है।
  • 10-12 ग्रेन्स: यह बैट शुरू से ही बहुत ‘पिंच’ (Pinch) देता है, लेकिन इसकी उम्र कम हो सकती है।
  • टिप: अगर आप ज्यादा मैच खेलते हैं, तो 7-9 ग्रेन्स वाला बैट सबसे संतुलित होता है।

बैट के अलग-अलग हिस्से (Anatomy of a Bat)

​बैट का हर हिस्सा अलग काम करता है:

  • Sweet Spot (बीच का हिस्सा): यह वो जगह है जहाँ गेंद लगने पर सबसे ज्यादा दूरी तय करती है। लो-स्वीड स्पॉट (Low Sweet Spot) फ्रंट फुट खेलने वालों के लिए और हाई-स्वीट स्पॉट (High Sweet Spot) बैक फुट खेलने वालों के लिए अच्छा होता है।
  • Spine (रीढ़): बैट के पीछे का उठा हुआ हिस्सा। जितनी मोटी स्पाइन होगी, बैट में उतनी ही ज्यादा पावर होगी।
  • Handle (हैंडल): हमेशा ‘Short Handle’ और ‘Cane Handle’ वाला बैट चुनें। केन हैंडल झटकों (Shocks) को सोख लेता है और आपके हाथों को चोट से बचाता है।

बैट का वजन और बैलेंस (Weight & Balance)

​सिर्फ वजन देखना काफी नहीं है, बैट का ‘Pick-up’ देखना जरूरी है।

  • ​हो सकता है कि एक 1180 ग्राम का बैट उठाने में 1150 ग्राम के बैट से हल्का लगे। इसे ‘बैलेंस’ कहते हैं।
  • ​हमेशा बैट को हाथ में उठाकर अपनी तकनीक (ड्राइव या पुल) के हिसाब से चेक करें कि वह उठाने में भारी तो नहीं लग रहा।

बैट की उम्र बढ़ाने के ‘प्रो-टिप्स’ (Maintenance Hacks)

  • नमी से दूर रखें: बारिश के मौसम में बैट को हमेशा किट बैग में रखें। गीली गेंद से खेलने के बाद बैट को सूखे कपड़े से पोंछें।
  • जूतों से बचाएं: कभी भी अपने बैट के निचले हिस्से (Toe) को जूतों के स्पाइक्स से साफ न करें, इससे लकड़ी चटक सकती है।
  • सैंडपेपर का इस्तेमाल: अगर बैट पर हल्के दाग या तेल की परत जम जाए, तो बहुत बारीक सैंडपेपर (Sandpaper) से धीरे-धीरे रगड़कर उसे साफ कर सकते हैं।

​”एक अच्छा बल्लेबाज बैट नहीं चुनता, बल्कि एक अच्छा बैट बल्लेबाज को चुनता है। बैट की मोटाई से ज्यादा उसके ‘बैलेंस’ पर ध्यान दें।”

Cricket bat knocking and oiling process बैट की देखभाल के लिए कुछ जरूरी टिप्स:

  1. Anti-Scuff Sheet: नॉकिंग के बाद बैट के फेस पर एक पारदर्शी शीट (Tape) जरूर लगाएं। यह बैट को दरारों और नमी से बचाता है।
  2. Toe Guard: बैट के निचले हिस्से को टूटने या पानी सोखने से बचाने के लिए टो-गार्ड का इस्तेमाल करें।
  3. धूप से बचाएं: बैट को कभी भी तेज धूप या कार की डिग्गी में ज्यादा देर न छोड़ें, इससे लकड़ी सूखकर चटक सकती है।

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. क्या इंग्लिश विलो और कश्मीर विलो दोनों को ऑयलिंग की जरूरत होती है?

हाँ, लेकिन इंग्लिश विलो को ज्यादा ध्यान से तैयार करना पड़ता है। कश्मीर विलो थोड़ा सख्त होता है, फिर भी हल्की ऑयलिंग और नॉकिंग उसकी लाइफ बढ़ा देती है।

Q. नॉकिंग के बिना खेलने से क्या होगा?

अगर आप बिना नॉकिंग के तेज गेंद खेलेंगे, तो बैट के किनारे (Edges) तुरंत टूट सकते हैं या बैट बीच से फट सकता है।

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